केदारताल हिमस्खलन हादसे में सात लोगों के शव बरामद, एक ट्रेकर अब भी लापता

उत्तरकाशी में भारी बर्फबारी और दस फीट से अधिक बर्फ जमा होने के कारण खोज अभियान अस्थायी रूप से रोका गया; लापता रतन घोष की तलाश जारी रखने की तैयारी।

उत्तरकाशी के केदारताल ट्रेक मार्ग पर हुए हिमस्खलन हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। 29 अक्टूबर को आए हिमस्खलन और भारी बर्फबारी के बाद ट्रेकिंग दल के आठ सदस्य लापता हो गए थे। कई दिनों तक चले खोज एवं बचाव अभियान के दौरान सात लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि पश्चिम बंगाल निवासी रतन घोष अब भी लापता बताए जा रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में दस फीट से अधिक बर्फ जमा है और लगातार बर्फबारी के कारण बचाव दलों के लिए आगे बढ़ना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी वजह से फिलहाल खोज अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

इस अभियान में एसडीआरएफ, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, पुलिस, वन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें शामिल रहीं। दुर्गम पहाड़ी रास्तों और खराब मौसम ने बचाव कार्य को लगातार चुनौतीपूर्ण बनाया। अधिकारियों के मुताबिक, बर्फ के नीचे दबे लोगों तक पहुंचने के लिए बचावकर्मियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद से ही प्रशासन की टीमें लापता सदस्यों की तलाश में जुटी थीं। अभियान के दौरान शवों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भी मौसम बाधा बना। स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा और पश्चिम बंगाल के ट्रेकर्स समेत सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

केदारताल क्षेत्र समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है और यहां तक पहुंचने वाला ट्रेक कठिन माना जाता है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में मौसम तेजी से बदलने और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने से जोखिम बढ़ गया था। इस हादसे ने हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग सुरक्षा, मौसम चेतावनी और अनुमति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने वाले ट्रेकर्स को मौसम की ताजा जानकारी, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित गाइड के साथ ही यात्रा करनी चाहिए। प्रशासन की ओर से मौसम में सुधार होने पर लापता ट्रेकर की तलाश दोबारा शुरू करने की संभावना जताई गई है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में मौसम और बर्फ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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