दिवाली से पहले देहरादून के बाजारों में आग का खतरा, संकरी गलियां और बिजली की तारें बनीं चुनौती

मोती बाजार में छह दुकानों में आग लगने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, फायर विभाग ने बाजारों में गश्त बढ़ाई।

राजधानी देहरादून के पुराने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में अग्नि सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजारों की संकरी गलियां, ऊपर से गुजरती बिजली की तारें और दुकानों में बढ़ता विद्युत भार किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। दिवाली के दौरान बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ने और पटाखों के इस्तेमाल के कारण यह खतरा और गंभीर हो जाता है। हाल ही में मोती बाजार में आग लगने से छह दुकानों के प्रभावित होने की घटना के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी बड़े बाजार में आग लगती है तो संकरी गलियों के कारण दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

दून उद्योग व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डीडी अरोड़ा ने दुकानों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता को जरूरी बताया है। उनका कहना है कि प्रत्येक दुकान के अंदर और बाहर अग्निशमन यंत्र होना चाहिए, लेकिन सभी व्यापारी इसका पालन नहीं करते। दूसरी ओर देहरादून के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिनव त्यागी ने बताया कि कई दुकानों में अतिरिक्त बिजली कनेक्शन और ओवरलोडिंग के कारण विद्युत आग लगने का खतरा रहता है। पुराने बाजारों में दुकानों की बनावट और बिजली व्यवस्था भी सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बनी हुई है। ऐसे में दुकानदारों को बिजली के तारों, स्विच बोर्ड और उपकरणों की नियमित जांच करानी चाहिए।

फायर विभाग ने उन बाजारों में आपातकालीन प्रतिक्रिया बेहतर बनाने के लिए सात पानी छिड़काव प्रणाली से लैस मोटरसाइकिलें तैनात की हैं जहां बड़े दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है। इसके अलावा जल संस्थान के पानी के टैंकर शहर के 41 स्थानों पर उपलब्ध कराए गए हैं। त्योहारों के दौरान दमकल विभाग की टीमें दिन में तीन बार बाजारों में गश्त कर रही हैं। अधिकारियों ने व्यापारियों और आम नागरिकों से दुकानों के सामने सामान या वाहन खड़े नहीं करने तथा आपातकालीन रास्ते खुले रखने की अपील की है। दिवाली के समय बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन, व्यापारियों और नागरिकों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है।

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