कई गांवों में काम शुरू होने का इंतजार, कुछ योजनाएं 80 से 90 प्रतिशत पूरी होने के बाद भी अधर में; ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जल जीवन मिशन की 100 से अधिक पेयजल परियोजनाएं बजट की कमी के कारण प्रभावित होने की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को घर तक नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन उत्तरकाशी के कई गांवों में अभी तक इस योजना का लाभ पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। कुछ स्थानों पर परियोजनाओं का काम शुरू ही नहीं हो सका है, जबकि कई अन्य योजनाएं काफी हद तक पूरी होने के बावजूद अधूरी पड़ी हैं। इससे ग्रामीणों को पुराने जलस्रोतों और पारंपरिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पहले से ही एक चुनौती है, ऐसे में योजनाओं का लंबे समय तक अधूरा रहना लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार चिन्यालीसौड़ क्षेत्र के नगणी और हिटारा गांवों के लिए प्रस्तावित लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद परियोजना करीब पांच वर्षों से लंबित है। इस योजना से दोनों गांवों और आसपास के नगर क्षेत्र की एक हजार से अधिक आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जिले के 50 से अधिक गांव ऐसे बताए गए हैं जहां जल जीवन मिशन के तहत काम शुरू होने का इंतजार है। कई परियोजनाओं में ठेकेदारों का भुगतान भी लंबित बताया गया है। यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल ने आरोप लगाया है कि धनराशि जारी नहीं होने के कारण योजनाओं का काम रुक गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि भुगतान और निर्माण कार्य में देरी जारी रही तो ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि केंद्र से धनराशि जारी होने की उम्मीद है और राशि प्राप्त होने के बाद लंबित कार्य पूरे कराए जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि पाइपलाइन बिछाए जाने के बाद भी उन्हें नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है। कुछ स्थानों पर लंबे समय से पड़ी पाइपलाइन खराब होने का खतरा भी बना हुआ है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार तक नियमित और सुरक्षित पानी पहुंचाना है। ऐसे में संबंधित विभागों को बजट जारी होने के साथ निर्माण की गुणवत्ता और योजनाओं के संचालन पर भी ध्यान देना होगा। यदि परियोजनाएं जल्द पूरी होती हैं तो पहाड़ी गांवों के हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है।
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