मांग के सापेक्ष अधिक या कम बिजली ग्रिड से लेने पर जुर्माने की परेशानी होती है। जो उपभोक्ताओं की जेब पर असर करता था। ऊर्जा निगम ने आईआईटी के युवाओं की मदद से एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो कि उन सभी बिंदुओं की लाइव रीडिंग देता है।
यूपीसीएल ने हर साल मांग के सापेक्ष अधिक या कम बिजली लेने के कारण लगने वाले 200 करोड़ रुपये से अधिक के जुर्माने से बचने का तरीका ईजाद कर लिया है। इसके लिए आईआईटी के विशेषज्ञों की मदद से ऑटोमैटिक डिमांड रिस्पांस सिस्टम (एडीआरएस) तैयार किया गया है।
यूपीसीएल के लिए राज्य के भीतर आ रही बिजली और बाहर जा रही बिजली का हिसाब-किताब रखना, रोजाना की अनुमानित मांग और उस हिसाब से बाजार से उपलब्धता, नेशनल ग्रिड से बिजली के आवंटन पर नजर रखने का काम परंपरागत व चुनौतीपूर्ण था। उस पर मांग के सापेक्ष अधिक या कम बिजली ग्रिड से लेने पर जुर्माने का सिरदर्द अलग, जो उपभोक्ताओं की जेब पर असर करता था।
ऊर्जा निगम ने आईआईटी के युवाओं की मदद से एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो कि उन सभी बिंदुओं की लाइव रीडिंग देता है, जहां से बिजली का राज्य के भीतर या बाहर आवागमन होता है। यह ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसमें बिजली का पूरा हिसाब किताब ग्राफ के रूप में स्क्रीन पर नजर आता है।
यूपीसीएल के निदेशक परियोजना अजय अग्रवाल ने बताया कि सॉफ्टवेयर से उपलब्धता के हिसाब से अचानक मांग अधिक होने पर मुख्यालय से ही बिजली काटी भी जा सकती है। इस तरह का लाइव सॉफ्टवेयर बनाने वाला यूपीसीएल पहला निगम है।
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