देहरादून के लेखक गांव में 25 अक्टूबर से अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, 40 देशों के विद्यार्थी होंगे शामिल

भारतीय भाषाओं और संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की भूमिका पर छह दिवसीय आयोजन में होगा विचार-विमर्श।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में 25 अक्टूबर से छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। आयोजन की थीम ‘भारतीय भाषाएं एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी’ रखी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य, संस्कृति और भाषाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना है। आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, लगभग 40 देशों के हिंदीभाषी विदेशी विद्यार्थी इसमें भाग लेंगे। महोत्सव में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की संभावनाओं, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और साहित्य के वैश्विक प्रसार पर चर्चा होगी। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति, डिजिटल संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय संवेदनाएं, समकालीन कथा साहित्य, कला, भारतीय सौंदर्यबोध, योग और आयुर्वेद जैसे विषयों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी से जुड़े कवि सम्मेलन भी प्रस्तावित हैं। इस तरह का आयोजन प्रदेश की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर दे सकता है। स्थानीय लेखकों, विद्यार्थियों और साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को समझने का मंच बनेगा। कार्यक्रम में भाषा संरक्षण के साथ यह चर्चा भी महत्वपूर्ण होगी कि डिजिटल माध्यमों और नई तकनीकों की मदद से भारतीय भाषाओं की सामग्री दुनिया के अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाई जा सकती है। हिंदी का अंतरराष्ट्रीय विस्तार केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि अनुवाद, शिक्षा, साहित्यिक संवाद और डिजिटल प्रकाशन जैसे क्षेत्रों से भी जुड़ा है। आयोजन का उद्घाटन राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन और समापन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। महोत्सव 29 अक्टूबर तक चलेगा।

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