पहाड़ के रहवासियों को रोड के अभाव में मीलों की दूरी पैदल नापनी पड़ती है. गांव में बीमार होने पर हालात विकराल हो जाते हैं.
चंपावत: दूरदराज इलाकों में आज भी मूलभूत सुविधाएं न पहुंचने के कारण ग्रामीणों को आए दिन परेशानियों से जूझना पड़ता है. प्रदेश के कई गांवों तक सड़क न होने के कारण आज भी मरीजों को डोली से सड़क तक पहुंचाना ग्रामीणों की विवशता है. आलम ये है कि लोगों को गांव से रोड तक पहुंचने के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता है. कुछ ऐसी ही तस्वीर चंपावत जिले के बकोड़ा गांव से सामने आई है, जहां बुजुर्ग व्यक्ति को ग्रामीण एक डंडे के सहारे 8 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया. जहां से वाहन से बुजुर्ग को हॉस्पिटल तक ले जाया गया.
चंपावत के बकोड़ा गांव में सड़क का दर्द एक बार फिर सामने आया है. 80 वर्षीय दीवान सिंह के पैर में चोट लगने के बाद जब अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ी तो ग्रामीणों को उन्हें डंडे के सहारे करीब आठ किलोमीटर पैदल ढोकर सड़क तक ले जाना पड़ा. लगातार बारिश के बीच ग्रामीणों ने करीब दो घंटे तक कंधे पर उठाकर बुजुर्ग को सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद वाहन से 35 किलोमीटर दूर टनकपुर अस्पताल ले जाया गया.
सड़क नहीं होने से मरीजों और घायलों को इसी तरह डोली या डंडे के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है. सड़क बनने से अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा की 500 से अधिक आबादी को लाभ मिलेगा. सड़क के अभाव में गांव से पलायन भी बढ़ रहा है.
-रवींद्र रावत, ग्राम प्रधान, बकोड़ा गांव-
साल 2012 से सड़क का इंतजार कर रहे तल्लादेश के ग्रामीणों को सड़क के अभाव में मरीजों और घायलों को आज भी डोली और डंडे के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है. नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के बकोड़ा गांव में सड़क सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बीते दिन 80 वर्षीय दीवान सिंह को उपचार के लिए ग्रामीणों ने डंडे में बांधकर करीब आठ किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया. इसके बाद वाहन से उन्हें करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया.
22.30 किलोमीटर लंबी मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं. 18.30 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी गई है. वन प्रस्ताव भी अपलोड कर दिया गया है, स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा.
-वीरेंद्र सिंह बोहरा, ईई, पीएमजीएसवाई चंपावत-
दीवान सिंह के पैर में कुछ चीज चुभ गई थी, दर्द बढ़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी. ग्रामीण रवींद्र रावत, जगदीश सिंह, प्रियांशु और केदार ने बारी-बारी से कंधा देकर उन्हें डंडे के सहारे मोस्टा से सीम गांव की सड़क तक पहुंचाया. लगातार बारिश के बीच करीब दो घंटे में यह सफर पूरा हुआ. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वहीं इस विधानसभा का नेतृत्व सूबे के सीएम करते हैं.
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