देहरादून। उत्तराखंड पत्रकार संगठन समन्वय समिति के संयोजक एवं पहाड़ों की गूंज के संपादक जीतमणि पैन्यूली ने राज्य सरकार से न्यूज पोर्टल और वेब चैनलों को सरकारी विभागों की निविदाओं तथा विज्ञापन उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया आज जनसंचार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, इसलिए न्यूज पोर्टलों को सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में उचित स्थान दिया जाना आवश्यक है।
पैन्यूली के अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में संचार सुविधाओं और ओएफसी नेटवर्क के विस्तार के मुद्दे को लेकर उन्होंने लंबे समय तक अभियान चलाया। उनका दावा है कि इस मुहिम के दौरान पत्रकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया तथा इसके लिए व्यक्तिगत स्तर पर समय और आर्थिक संसाधन भी लगाए गए।
उन्होंने कहा कि ओएफसी लाइन बिछने और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार से पहाड़ी क्षेत्रों में बैंकिंग तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक तेजी से पहुंचने लगी। देश-विदेश में काम करने वाले उत्तराखंड के लोगों को भी अपने परिवार और गांव की जानकारी लगातार मिलती रही, जिससे उन्हें सामाजिक रूप से जुड़ाव बनाए रखने में मदद मिली।
सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में पोर्टलों को शामिल करने की मांग
पैन्यूली ने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के बावजूद न्यूज पोर्टलों के सामने आर्थिक संकट बना हुआ है। उनके मुताबिक राज्य में बड़ी संख्या में न्यूज पोर्टल संचालित हो रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर सूचीबद्धता और विज्ञापन की प्रक्रिया अभी भी बड़ी चुनौती है।
उन्होंने बताया कि करीब 1800 न्यूज पोर्टलों की सूचीबद्धता की मांग को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से सूचीबद्ध पोर्टलों को भी समय पर सरकारी विज्ञापन नहीं मिलने से उनके संचालन पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने तत्कालीन महानिदेशक रणवीर सिंह के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उस समय पोर्टलों को काम करने योग्य दरों पर विज्ञापन उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई थी। उनका आग्रह है कि उसी प्रकार डिजिटल मीडिया को मजबूत करने के लिए पारदर्शी और व्यावहारिक विज्ञापन नीति बनाई जाए।
अभियान में व्यक्तिगत आर्थिक नुकसान का दावा
पैन्यूली ने कहा कि इस अभियान के दौरान उन्होंने वर्ष 2013-14 तक अपने अखबार के काम को प्रभावित करते हुए पत्रकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों के लिए समय दिया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में आर्थिक दायित्व भी बढ़े और वर्तमान में लगभग 4.50 लाख रुपये की देनदारी होने की बात कही।
उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट के बावजूद जनसेवा और पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें लगातार काम करने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि पत्रकारिता केवल व्यवसाय नहीं बल्कि जनसमस्याओं को सामने लाने का माध्यम भी है।
पत्रकारों से एकजुट होने की अपील
उत्तराखंड पत्रकार संगठन समन्वय समिति के संयोजक ने पत्रकारों और न्यूज पोर्टल संचालकों से एकजुट होकर इस मुद्दे को उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल मीडिया से जुड़े लोग सामूहिक रूप से अपनी मांग सरकार के सामने रखते हैं तो रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और राज्य में डिजिटल पत्रकारिता को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने रविवार अथवा सभी की सुविधा के अनुसार देहरादून में बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। बैठक में पत्रकारों, पोर्टल संचालकों और जनहित से जुड़े लोगों से हस्ताक्षर करवाकर विधायकों से संस्तुति लेने तथा मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की योजना बताई गई है।
सभी विभागों के विज्ञापन और टेंडर पोर्टलों पर प्रकाशित कराने की मांग
पैन्यूली ने सरकार से मांग की है कि लोनिवि, सिंचाई, पावर कॉरपोरेशन, वन विभाग, शिक्षा, आरईएस, निर्वाचन, स्वास्थ्य सहित अन्य सरकारी विभागों और विद्यालयों के विज्ञापन तथा निविदाओं को मान्यता प्राप्त न्यूज पोर्टलों और वेब चैनलों के माध्यम से भी प्रकाशित कराया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापन और निविदाओं की डिजिटल पहुंच बढ़ने से आम लोगों को सरकारी योजनाओं, रोजगार, निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं की जानकारी आसानी से मिल सकती है। इससे पारदर्शिता और सूचना की पहुंच भी बेहतर हो सकती है।
उन्होंने पत्रकारों से अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत आर्थिक हित के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे डिजिटल पत्रकारिता, रोजगार और जनहित से जुड़े व्यापक विषय के रूप में उठाया जाए।
जीतमणि पैन्यूली
संपादक – पहाड़ों की गूंज
संयोजक – उत्तराखंड पत्रकार संगठन समन्वय समिति
संपर्क: 7983825336, 8755286843
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