प्रवास के जरिए हारी सीटों को जीतने की रणनीति, कांग्रेस बोली- प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त, भाजपा प्रवास में मस्त

उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी है. हारी सीटों पर बीजेपी फोकस कर रही है.

देहरादून: भाजपा नेताओं का अलग-अलग क्षेत्रों में दो दिवसीय प्रवास जारी है. हालांकि, ये प्रवास आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अन्य नेता अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास कार्यक्रम के दौरान बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर फीड बैक ले रहे हैं. साल 2022 में हारने वाली 23 सीटों को मजबूती प्रदान करने के लिए बीजेपी कोर कमेटी के सदस्यों समेत मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, विधायक और सांसद दो दिवसीय प्रवास करने का अभियान जारी हैं. वहीं, कांग्रेस इस पर कई सवाल खड़े कर रही है?

उत्तराखंड में साल 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं. जिसके मद्देनजर प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियों भाजपा और कांग्रेस चुनावी शंखनाद के साथ में चुनावी रणनीतियों को तैयार करने की कवायद में जुटी हुई है. ताकि आगामी चुनाव की बैतरणी को पार कर सके. जहां एक ओर कांग्रेस अपने पार्टी को मजबूत करने की रणनीतियों पर काम कर रही है. वहीं, दूसरी ओर भाजपा साल 2022 में विधानसभा चुनाव में हारी सीटों को जीतने के लिए रणनीतियां पर काम कर रही है. इसी क्रम में भाजपा ने प्रदेश कोर कमेटी के सदस्यों को हारी हुई विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास करवा रही है. ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में इन सीटों को भी जिताऊ बनाया जा सके.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रवास कार्यक्रम तैयार किया गया है. जिसमें भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है. मुख्य रूप से भाजपा के सभी 47 विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में दो दिवसीय प्रवास कर रहे हैं. इसके अलावा भाजपा के कोर कमेटी के सदस्य जिसमें मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री, सांंसद और राज्य सरकार के तीन मंत्री शामिल हैं. ऐसे में जो 23 विधानसभा सीटों को भाजपा 2022 में नहीं जीत पाई थी. इन विधानसभा सीटों को फोकस करते हुए कोर कमेटी के सदस्यों के साथ ही प्रदेश पदाधिकारियों का प्रवास कार्यक्रम तय किए गए हैं.
-कुंदन परिहार, प्रदेश महामंत्री, भाजपा-

दरअसल, आगामी विधानसभा चुनाव प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के लिए नाक और साख का सवाल बनी हुई है. मुख्य रूप से भाजपा लगातार दो बारी से सत्ता पर काबिज है. ऐसे में जहां एक और भाजपा के लिए एक बार फिर सत्ता पर काबिज होकर हैट्रिक लगाने की चुनौती है. वहीं, दूसरी ओर लगातार दो बार से सत्ता से दूर कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी भी एक बड़ी चुनौती है. यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों नाक और साख का सवाल बनी आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पूरी रणनीतियों के साथ काम कर रही है.

पिछले विधानसभा चुनाव में जो भाजपा 23 सीटें हारी थी उस पर वो मेहनत कर रही है. ऐसे में हो सकता है इन 23 सीटों में कुछ सीटें जीत जाए, लेकिन जो 47 सीटें जीते थे वो सभी सीटे हारेंगे. पूरे प्रदेश में जो वातावरण बना है, उसके अनुसार कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है. लेकिन भाजपा को चुनाव के अलावा कुछ नहीं आता है और प्रवास कर रहे हैं. जब पिछले 10 सालों से राज्य में भाजपा की सरकार है, उन्होंने पूरे राज्य का बेड़ा गर्त कर दिया है.
-सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस-

साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रवास का दौर जारी है तो वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बाजपुर में प्रवास शुरू हो गया है. ऐसे में भाजपा का फोकस है कि साल 2022 में जिन सीटों को नहीं जीत पाए थे, उस पर विशेष रणनीति के तहत जीतने का पूरा प्रयास कर रही है. साथ ही कहा कि 13 जून से 16 जून तक के लिए प्रवास कार्यक्रम रखा गया है. ऐसे में इस दौरान अधिकतर नेताओं ने प्रवास शुरू कर दिया है. लेकिन कुछ नेताओं की व्यस्थता के चलते नहीं शुरू कर पाए हैं, लेकिन 20 जून तक सभी नेता अपने प्रवास कार्यक्रम को पूरा कर लेंगे.

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