उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में प्रशासकीय और वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य के वित्त विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनियमित खर्च, नियुक्तियों और वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं, जिन पर त्वरित जांच और जवाबदेही आवश्यक है।

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई शिकायतें विभाग के पास पहुंची थीं। इनमें बिना स्वीकृति खर्च, अनुचित भुगतान और खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
वित्त विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रत्येक वित्तीय लेन-देन और निर्णय की जांच रिपोर्ट सात कार्यदिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि गड़बड़ियों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध वित्तीय दंड और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच की संभावना से इंकार नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और वित्तीय अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वे सभी वित्तीय दस्तावेज और रिपोर्ट समय पर वित्त विभाग को उपलब्ध कराएंगे तथा यदि किसी स्तर पर त्रुटि हुई है तो उसे सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मामले की जांच जारी है और वित्त विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
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