बदरीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे के बाद दो पायलट अनिवार्य करने के नियम पर विवाद, ऑपरेटरों से बातचीत विफल होने के बाद DGCA ने लिया फैसला।
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर से सफर करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने चारधाम मार्ग पर संचालित होने वाली चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाओं को मौजूदा यात्रा सीजन के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया है। यह निर्णय बदरीनाथ से देहरादून लौट रहे हेलीकॉप्टर के चमोली जिले में दुर्घटनाग्रस्त होने और उसमें सवार छह लोगों की मौत के बाद लिया गया है। हादसे के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर समीक्षा शुरू हुई थी। इसके तहत चारधाम मार्ग पर संचालित हेलीकॉप्टरों में दो पायलट अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि हेलीकॉप्टर संचालकों ने इस नियम को तत्काल लागू करने में तकनीकी और आर्थिक कठिनाइयों का हवाला दिया। सोमवार को DGCA, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण और हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के बीच हुई बैठक में भी सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद चार्टर सेवाओं को शेष सीजन के लिए बंद करने का फैसला सामने आया।
हेलीकॉप्टर संचालकों का कहना है कि दो पायलटों के साथ उड़ान संचालित करने के लिए कई हेलीकॉप्टरों में तकनीकी बदलाव करने पड़ेंगे। इसके लिए अतिरिक्त नियंत्रण प्रणाली लगाने और यात्रियों की संख्या कम करने जैसी व्यवस्थाएं करनी होंगी। इससे संचालन लागत बढ़ेगी और उपलब्ध समय में सभी आवश्यक बदलाव करना व्यावहारिक नहीं होगा। ऑपरेटरों ने यह भी कहा है कि चारधाम यात्रा का मौजूदा सीजन समाप्त होने में बहुत कम समय बचा है और इतने कम समय में सभी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करना संभव नहीं है। दूसरी ओर नियामक का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ान संचालन के दौरान दो पायलट होने से निगरानी, निर्णय लेने और आपात स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है। UCADA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन के अनुसार दो पायलटों की व्यवस्था के लिए हेलीकॉप्टरों में भौतिक बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। इसी कारण संचालकों ने तत्काल नियम लागू करने पर आपत्ति जताई है।
चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाओं का विशेष महत्व है, क्योंकि केदारनाथ जैसे धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। बुजुर्गों, दिव्यांगों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा काफी उपयोगी रहती है। ऐसे में सेवाओं के निलंबन का असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिन्होंने चार्टर उड़ानों के माध्यम से यात्रा की योजना बनाई थी। बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को बंद होने निर्धारित हैं, जबकि केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट 11 नवंबर को बंद होंगे। इस कारण यात्रा सीजन का अंतिम चरण चल रहा है। प्रशासन और विमानन नियामक के सामने अब यात्रियों की सुरक्षा तथा सेवा संचालन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय उड़ानों में सुरक्षा मानकों को मजबूत करना बताया जा रहा है। श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले संबंधित हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता और प्रशासन से ताजा जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
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