गैरसैंण में विधानसभा सत्र शुरू, धामी सरकार पेश करेगी 7 हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट

दो दिवसीय सत्र के पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि, आठ विधेयक पेश करने की तैयारी; बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अंकिता भंडारी प्रकरण पर विपक्ष के सवालों की संभावना।

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा में आज, 27 अक्टूबर 2026 से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार इस सत्र में सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट सदन में पेश करने की तैयारी में है। विधानसभा सचिवालय की ओर से सत्र के लिए व्यवस्थाएं पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है। निर्धारित कार्यसूची के अनुसार, पहले दिन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद भोजनावकाश के बाद सरकार अनुपूरक बजट और विधेयक सदन के पटल पर रखेगी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस सत्र में आठ विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें समान नागरिक संहिता से संबंधित संशोधन, जनविश्वास अधिनियम में बदलाव और माल एवं सेवा कर कानून से जुड़ा विधेयक शामिल बताया गया है। सत्र में विभिन्न विभागों और बोर्डों की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट भी रखी जा सकती हैं।

अनुपूरक बजट राज्य सरकार को वित्तीय वर्ष के दौरान उन अतिरिक्त खर्चों के लिए प्रावधान करने का अवसर देता है, जिनकी आवश्यकता मूल बजट तैयार होने के बाद सामने आती है। इसमें विकास कार्यों, विभागीय योजनाओं और अन्य सरकारी दायित्वों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, किस विभाग को कितनी राशि मिलेगी और किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, इसकी पुष्टि बजट दस्तावेजों और सदन में होने वाली कार्यवाही से होगी। विधानसभा सचिवालय को विधायकों की ओर से 445 प्रश्न प्राप्त होने की रिपोर्ट है, लेकिन पहले दिन श्रद्धांजलि कार्यक्रम के कारण प्रश्नकाल नहीं रखा गया है। सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही के लिए कार्यमंत्रणा समिति आगे का एजेंडा तय करेगी। गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होना राज्य की पर्वतीय पहचान और क्षेत्रीय विकास की राजनीति से भी जुड़ा है। स्थानीय नागरिकों की अपेक्षा रहती है कि सदन में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो।

इस सत्र का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि समाचार रिपोर्टों में इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मौजूदा सरकार का अंतिम सत्र बताया गया है। कांग्रेस ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई, कानून व्यवस्था और अंकिता भंडारी हत्याकांड सहित विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। पार्टी की ओर से आज विधानसभा घेराव का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है। ऐसे में सदन के भीतर विधायी कार्यवाही और बाहर होने वाले विरोध प्रदर्शन दोनों पर निगाह रहेगी। सरकार के सामने अनुपूरक बजट का औचित्य स्पष्ट करने और विपक्ष के सवालों का जवाब देने की चुनौती होगी। वहीं विपक्ष की भूमिका यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगी कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाए। नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बजट पेश होना और उसका खर्च होना अलग-अलग चरण हैं। राशि के उपयोग, योजनाओं की स्वीकृति और जमीन पर काम की प्रगति का आकलन बाद में सरकारी आदेशों और विभागीय रिपोर्टों से किया जा सकेगा।

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