हरियाली देवी मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है. हरियाली देवी को चार पट्टियों की आराध्य देवी माना जाता है.
रुद्रप्रयाग: देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में विशेष स्थान रखने वाले हरियाली देवी सिद्धपीठ में शारदीय नवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और प्राचीन धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है. मां के जयकारों, दुर्गा सप्तशती के पाठ और विशेष पूजा-अर्चना से सिद्धपीठ का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है. दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु मां हरियाली देवी के दर्शन कर सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगने पहुंच रहे हैं. यहां नवरात्रि की सबसे विशिष्ट परंपराओं में शामिल जौ की हरियाली श्रद्धालुओं के लिए आस्था, शुभता और मां के आशीर्वाद का प्रतीक बनी हुई है.
हरियाली देवी सिद्धपीठ में नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में जौ बोने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है. नौ दिनों तक जौ की हरियाली की विधिवत देखभाल की जाती है. धीरे-धीरे अंकुरित होकर हरी-भरी होती जौ की बालियां श्रद्धालुओं के लिए आस्था और शुभता का प्रतीक बन जाती हैं. नवमी के दिन विधि-विधान से हरियाली निकालकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है. भक्त इस पवित्र प्रसाद को मां का आशीर्वाद मानकर श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं.
यह परंपरा हरियाली देवी सिद्धपीठ को नवरात्रि के दौरान विशिष्ट धार्मिक पहचान प्रदान करती है. यहां जौ की हरियाली केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक आस्था और देवी उपासना का जीवंत प्रतीक है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां हरियाली देवी को विष्णु शक्ति, योगमाया और त्रिपुरसुंदरी के स्वरूप से भी जोड़ा जाता है. क्षेत्र के श्रद्धालुओं में मां के प्रति गहरी आस्था और अटूट विश्वास है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर सिद्धपीठ पहुंचते हैं और मां के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति, समृद्धि तथा लोककल्याण की प्रार्थना करते हैं.
घने जंगलों और पर्वतीय प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह सिद्धपीठ आध्यात्मिक शांति और धार्मिक चेतना का अनूठा केंद्र है. प्राकृतिक वातावरण के बीच मां के दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
हरियाली देवी सिद्धपीठ में नवरात्रि के दौरान होने वाली पूजा-अर्चना और जौ की हरियाली की परंपरा धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है. नवमी पर हरियाली का प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है. भक्त इसे मां का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं.
-विनोद प्रसाद मैठाणी, मुख्य पुजारी
भक्त हरीश नौटियाल ने कहा मां हरियाली देवी के प्रति क्षेत्र के लोगों की अटूट श्रद्धा है. नवरात्रि में सिद्धपीठ पहुंचकर मां के दर्शन करने और हरियाली का प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती है. मां से सभी के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है.
चार पट्टियों की आराध्य देवी हैं मां हरियाली: मां हरियाली देवी को बचणस्यूं, शिवचरण, सिरवाड़ीगढ़ और धनपुर की चार पट्टियों की आराध्य देवी के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है. इन क्षेत्रों में मां की उपासना से जुड़ी परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं. नवरात्रि के अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ ही लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं. नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाली आराधना में श्रद्धालु मां के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हैं.
आस्था, परंपरा और प्रकृति का दिव्य संगम: हरियाली देवी सिद्धपीठ में शारदीय नवरात्रि का उत्सव धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है. दुर्गा सप्तशती का पाठ, विशेष पूजा-अर्चना और जौ की हरियाली की परंपरा इस सिद्धपीठ की विशिष्ट पहचान को और मजबूत करती है. नवमी पर वितरित होने वाले हरियाली के प्रसाद को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है. मां के जयकारों से गूंजता सिद्धपीठ इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है.
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