कैबिनेट ने उपनल कर्मचारियों को VDA का लाभ देने पर निर्णय लिया है. कर्मचारियों ने विरोध कर सरकार की घेराबंदी की बात कही.
देहरादून: उपनल कर्मचारियों का मामला पिछले करीब एक दशक से सुलझने का नाम नहीं ले रहा है. यह स्थिति तब है जब प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट तक आदेश सुना चुकी है, और सुप्रीम कोर्ट भी धामी सरकार की अपील को खारिज कर चुकी है. ऐसे में सरकार के सामने एकमात्र रास्ता हाई कोर्ट के आदेश का पालन करना ही रह गया है. लेकिन इसके बावजूद सरकार मामले में फिलहाल नए रास्ते तलाशने में ही जुटी हुई है.दरअसल मामले को लेकर सरकार पहले ही अवमानना का सामना कर रही है, ऐसे में अब सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.
साल 2018 में हाईकोर्ट ने दो टूक उपनल कर्मियों के पक्ष में निर्णय लेते हुए उन्हें नियमित करने का आदेश बनाया था. इस प्रक्रिया के पूरा होने तक कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने के आदेश दिए थे. हालांकि इसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन उसमें भी सरकार की अपील को खारिज कर दिया गया. इसके बाद धामी सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने की हरी झंडी दे दी.
लेकिन एक लंबा वक्त बीतने के बाद भी इस पर शत प्रतिशत अनुपालन नहीं कराया जा सका है. बड़ी बात यह है कि पहले ही इस बात से नाराज उपनल कर्मचारियों का आक्रोश उस समय फूट पड़ा जब एक दिन पहले ही कैबिनेट की बैठक में उपनल कर्मियों को VDA (Variable Dearness Allowance) का लाभ देने का फैसला लिया गया.
सरकार ने पहले समान काम के बदले समान वेतन में कर्मचारियों के साथ अनुबंध करके उन्हें फंसाने की कोशिश की और अब DA देने की बजाय VDA देने का निर्णय लेकिन फिर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की है. हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के कारण पहले ही सरकार कोर्ट के आदेश की अवमानना कर चुकी है और अब कैबिनेट में VDA देने का निर्णय लेकर सरकार ने कर्मचारियों के खिलाफ चाल चलने का फैसला ले लिया है. सरकार के इस फैसले का उपनल कर्मचारी विरोध करेंगे.
-प्रमोद सिंह गुसाईं, प्रदेश महामंत्री, उपनल कर्मचारी महासंघ-
दरअसल हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर 10 सितंबर की तारीख लगी है, जब हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना याचिका पर सुनवाई होनी है. बड़ी बात यह है कि अवमानना को लेकर शासन के तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया है यानी तीन बड़े अधिकारियों की पर्सनल अपीरियंस लगाई गई है. इसमें सचिव कार्मिक, सचिव वित्त और सचिव सैनिक कल्याण शामिल है. इन तीनों ही अधिकारियों को अवमानना के मामले में कोर्ट में खुद प्रस्तुत होना है.
उपनल कर्मचारियों की नाराजगी को लेकर नया रास्ता ढूंढा जाएगा. राज्य सरकार प्रदेश की वित्तीय हालातों को देखते हुए जो भी जरूरी कदम उठाया जाना है, उसी के आधार पर फैसले ले रही है.
-गणेश जोशी, सैनिक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड-
उत्तराखंड सरकार बार-बार वित्तीय रूप से राज्य की स्थिति ठीक नहीं होने की बात कहती रही है, और इसी को आधार बनाकर उपनल कर्मचारी को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पूरा लाभ दिए जाने से भी सरकार बचती रही है. हालांकि अब अवमानना याचिका पर सुनवाई के साथ ही सरकार पर कोर्ट के आदेशों का पालन करने को लेकर भारी दबाव है.
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