ED ने देहरादून DAV PG कॉलेज स्कॉलरशिप स्कैम केस में दो आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की.![]()
देहरादून: डीएवी पीजी कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दो आरोपियों पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है. इससे पहले हुई जांच में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लिए जारी छात्रवृत्ति की करोड़ों रुपए की राशि को कथित तौर पर फर्जी बैंक खाते के माध्यम से दोनों आरोपियों पर गबन कर निजी उपयोग में लगाने के आरोप सामने आए हैं.
ईडी की जांच के अनुसार, साल 2009 से 2014 के बीच एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए जारी छात्रवृत्ति की राशि को एक अनधिकृत बैंक खाते में जमा किया गया. जांच में सामने आया कि उक्त खाते में छात्रवृत्ति की रकम, अन्य कॉलेज खातों से ट्रांसफर की गई राशि और ब्याज समेत करीब 2.27 करोड़ रुपए जमा हुए थे. इस मामले में पहले उत्तराखंड पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की. जांच में पाया गया कि कॉलेज प्रबंधन समिति ने बैंक की लक्ष्मी रोड शाखा में खाता खोलने की अनुमति दी थी. लेकिन दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर जीएमएस रोड शाखा में एक अलग और अनधिकृत बैंक में खाता खोल दिया गया.
ईडी के मुताबिक, कॉलेज कर्मचारी पीयूष चंद्र भटनागर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस खाते का संचालन किया और छात्रवृत्ति की राशि को व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया. ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि अनधिकृत खाते से 42.50 लाख रुपए नकद जबकि 66.50 लाख रुपए अलग-अलग व्यक्तियों के नाम जारी चेक के माध्यम से निकाले गए. इसके अलावा, 99.43 लाख रुपए सीधे पीयूष चंद्र भटनागर के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी ने ये भी पाया कि इसके बाद रकम को कई खातों में घुमा कर निजी उपयोग, नकद निकासी और अन्य वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल किया गया.
जांच के दायरे में रंजना रावत की भूमिका: ईडी के अनुसार, रंजना रावत जो कॉलेज के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और छात्रवृत्ति समन्वयक थीं, उन्होंने भी इस घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जांच में सामने आया कि उन्होंने कई खाली चेक पर साइन किए थे. जिनका बाद में छात्रवृत्ति की राशि निकालने और उसे विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया गया. एजेंसी का कहना है कि साइन किए गए सभी चेक ने कथित तौर पर अवैध वित्तीय लेनदेन को आसान बनाया.
बीमा पॉलिसी और वाहन खरीदने में इस्तेमाल हुई रकम: जांच में यह भी सामने आया कि कथित अपराध से अर्जित धन का एक हिस्सा बीमा पॉलिसियों, बैंक जमा और अन्य चल संपत्तियों में निवेश किया गया. ईडी ने पाया कि आरोपी और उनके परिवार के नाम पर बीमा पॉलिसियां खरीदी गईं और एक होंडा एक्टिवा एच स्मार्ट (125 सीसी) वाहन भी खरीदा गया. इसी आधार पर ईडी ने 7.86 लाख रुपए मूल्य की चल संपत्तियों को अटैच किया है.
एजेंसी के अनुसार, बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी सबूतों और पीएमएलए की धारा-50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर ईडी ने पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 और 4 के तहत देहरादून की विशेष अदालत में अभियोजन ने चार्जशीट दाखिल की है.
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