राज्य गठन के बाद आयोग ने तीसरी बार बिजली दरें नहीं बढ़ाई। इससे पूर्व वर्ष 2006-07 व 2014-15 में आयोग ने शून्य टैरिफ दिया था। 2003 में पहला टैरिफ आदेश जारी हुआ था।
| वर्ष | प्रतिशत | बढ़ोतरी |
| 2010 | 10 | 17 |
| 2012 | 11 | 10 |
| 2013 | 14- | 05 |
| 2014 | 15 | 00 |
| 2015 | 16 | 7.30 |
| 2016 | 17 | 5.10 |
| 2017 | 18 | 5.80 |
| 2018 | 19 | 2.60 |
| 2019 | 20 | 3.50 |
| 2020 | 21 | 4.50 |
| 2021 | 22 | 4.30 |
| 2022 | 23 | 2.68 |
| 2023 | 24 | 9.64 |
| 2024 | 25 | 6.92 |
| 2025 | 26 | 5.62 |
| 2026 | 27 | 00 |
पहले टैरिफ आदेश के समय 2801 गांवों में नहीं थी बिजली
आयोग ने वर्ष 2003 में जो पहला टैरिफ आदेश जारी किया था, उस वक्त 2801 गांव बिना बिजली के थे। केवल 30 प्रतिशत घरों में ही बिजली का कनेक्शन था। यूपीसीएल के प्रस्ताव में आयोग ने स्पष्ट किया गया था कि इन गांवों तक बिजली पहुंचानी है।
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